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मै इतना आसान नही हूँ

मै इतना आसान नही हूँ 
कोई गिरा समान नही हूँ ।
चन्दर वरदायी की थाती
कबिरा का अरमान  कही हूँ ।।

चलते-चलते थक सकता हूँ 
परिहासो मे बक सकता हूँ ।
स्वाभिमान को ठेस लगी तो
पद को वही रगड सकता हूँ ।।

हाँ -हाँ  प्रेम पियासा है मन
सच्चे लोग सदा मेरे धन ।
तनिक भाव मे बह जाता हूँ 
क्योकि नही रहा हूँ मै वन ।।

वनचर सा व्यवहार नही है
स्वारथ वाला प्यार नही है ।
अच्छा लगता पैर चूमना
गडने वाला खार नही है ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र

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5 Comments

बहुत सुंदर 👌👌

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Varsha_Upadhyay

13-Mar-2023 06:23 PM

बेहतरीन

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