मै इतना आसान नही हूँ
मै इतना आसान नही हूँ
कोई गिरा समान नही हूँ ।
चन्दर वरदायी की थाती
कबिरा का अरमान कही हूँ ।।
चलते-चलते थक सकता हूँ
परिहासो मे बक सकता हूँ ।
स्वाभिमान को ठेस लगी तो
पद को वही रगड सकता हूँ ।।
हाँ -हाँ प्रेम पियासा है मन
सच्चे लोग सदा मेरे धन ।
तनिक भाव मे बह जाता हूँ
क्योकि नही रहा हूँ मै वन ।।
वनचर सा व्यवहार नही है
स्वारथ वाला प्यार नही है ।
अच्छा लगता पैर चूमना
गडने वाला खार नही है ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र
Madhu Gupta "अपराजिता"
16-Mar-2023 09:03 PM
बहुत सुंदर 👌👌
Reply
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
13-Mar-2023 07:41 PM
शानदार
Reply
Varsha_Upadhyay
13-Mar-2023 06:23 PM
बेहतरीन
Reply